मैं कल रात नहीं रोया था
दुख सब जीवन के विस्मृत कर,
तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,
तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था!
मैं कल रात नहीं रोया था!
प्यार-भरे उपवन में घूमा,
फल खाए, फूलों को चूमा,
कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैं ने ढोया था!
मैं कल रात नहीं रोया था!
किन आँखो ने तेरे उर पर
ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था!
मैं कल रात नहीं रोया था!
कविवर हरीवंश राय बच्चन की कविता आप को समर्पित कर रहा हूँ क्योंकि हमारी संस्कृति मैं बड़ों का स्थान सबसे ऊपर है ।
इस ब्लॉग के मध्यम से देश की एकता , अखंडता और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार नियमित रूप से देता रहूँगा । साथ ही नए - नए तथ्यों से आपको रूबरू करवाते रहेंगे कहीं न कहीं आपके विचारों को आप तक पहुँचा पाने में आपकी बात करने में सफलता पाना मेरा उद्देश्य रहेगा । सुधिजनों से सभी विषयों पर प्रतिक्रिया का इन्तेजार रहेगा ।
आपका
आनंद अधीर '
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